Saturday, June 4, 2016

चलो फिर से बात करते हैं

थोड़ी लंबी ये रात करते हैं। 
चलो फिर से बात करते हैं
चाँद के चकले पे दो रोटियां बेलेंगे
बाँट लो सितारे आज शतरंज खेलेंगे
आओ शै और मात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।
यार चाँद को देखो
 कैसा इसका ईमान है
करवा चौथ पे हिन्दू
और ईद पे मुस्लमान है
इस जैसी ही औकात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।

बेरोक टोक सबको
चांदनी का प्रकाश मिले
बिन जात पूछे सबको
खुला आकाश मिले
ऐसे अब हालात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।
पौ फटने को है
चलो बतियाते चलो
रात के अँधेरे से
सीखते सीखाते चलो
इंसां अपनी जात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।
थोड़ी लंबी ये रात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।
---------रमेश चहल।

4 comments:

vibha rani Shrivastava said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 02 जुलाई 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

sunita agarwal said...

यार चाँद को देखो
कैसा इसका ईमान है
करवा चौथ पे हिन्दू
और ईद पे मुस्लमान है
इस जैसी ही औकात करते हैं।
चलो फिर से बात करते हैं।
behtreen kavita

Ramesh Chahal said...

thnx sunita agrwal ji

Unknown said...
This comment has been removed by the author.